Kumarpal Maharaja Ni Prarthna | 19-06-2026 | Pune

1 Min Read

प्रभु का प्रेम

हम निमित्तवासी हैं। कभी कभी क्रोध आ भी जाएगा। लेकिन क्रोध से दुर्गति होती है, नरक में जाना पड़ता है और प्रभु की आज्ञा है कि प्रेम से रहो – जैसे ही यह जागृति आ गई, क्रोध आया और गया! Touch and go!

इस चातुर्मास में न तो मुझे वाचना देनी है, न मुझे प्रवचन देने हैं; सिर्फ प्रभु का प्रेम जो मैंने Enjoy किया है, वो प्रेम आपको देना है। वाचना प्रभु देंगे, प्रवचन प्रभु देंगे; मेरा काम क्या? आप सबको प्रेम देना!

रोज हम मंदिर जाते हैं; इसीलिए जाते हैं कि प्रभु का प्रेम जो बरस रहा है, उस प्रेम को हम झेलें, Enjoy करें। प्रभु का प्रेम झेल लिया आपने, तो आपका हृदय निर्मल-निर्मल हो जाएगा। मेरे देखे इस जन्म में हमारा लक्ष्य यही है कि हम हमारे हृदय को निर्मल बनाएं।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *