प्रभु-माँ
प्रभु जैसी माँ मिल जाए, कितना बड़ा सौभाग्य हमारा होगा! सर्वशक्तिमान, अखिलेश्वर, त्रिलोकेश्वर परमात्मा हमारी माँ हो! फिर हमें जो भी चाहिए, तत्क्षण मिल जाएगा। प्रभु तो माँ बनने के लिए तैयार हैं; पर क्या आप बालक बनने के लिए तैयार हैं?
बच्चे की सिर्फ एक लाक्षणिकता है। बीमार हो गया, पेट में दर्द है, भूख लगी है – कुछ भी तकलीफ है, कुछ भी चाहिए; बच्चा सिर्फ माँ के सामने देखेगा। सिर्फ माँ ही बच्चे के लिए पूरी दुनिया है; माँ के अतिरिक्त कुछ भी नहीं। हम भी प्रभु-माँ के बच्चे तभी बन सकते हैं, जब सिर्फ माँ की ओर ही हमारी दृष्टि जाती हो।
जीवनमें कोई भी तकलीफ आए, सिर्फ प्रभु के सामने हम देखेंगे और प्रभु से निवेदन करेंगे कि “प्रभु! मुझे समाधि दो”। साधना के भी किसी अग्रिम पड़ाव पर पहुंचने के लिए हमारी एक ही बात हो : “प्रभु! यह पड़ाव मुझे दे दो” और प्रभु दे देंगे! साधना भी प्रभु देंगे; साधना का आनंद भी प्रभु देंगे।
