Kumarpal Maharaja Ni Prarthna | 20-06-2026 | Pune

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सद्गुरु

सद्गुरु का अर्थ है जिसने अपना हृदय Totally vacant कर दिया, बिल्कुल शून्य कर दिया। फिर उस रीतापन में, उस शून्यपन में परमात्मा का अवतरण हो जाता है। जिस चेतना में परम चेतना का अवतरण हुआ, वह सद्गुरु चेतना।

सद्गुरु के आपके प्रति खुलनेवाले दो ही कार्य हैं। एक कार्य है आपमें अगर प्रभुमिलन की प्यास नहीं जगी है, तो उसे जगाना। और दूसरा कार्य है कि अगर आपमें वह प्यास जग गई है, तो प्रभु से आपका मिलन कराना!

प्रभु से आपका मिलन कराने के लिए ज़रूरी है आपको निर्मल बनाना। गुरु चेतना यह कार्य करती है; आपको, आपके हृदय को निर्मल बनाती है। और जैसे ही आपका हृदय निर्मल बना, परम चेतना उसमें अवतरित हो जाती है।

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